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ऑनलाइन शिक्षा कितना सही .....

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मेरा व्यक्तिगत सोच है कि हर गांव में गुरुजी है, जो अपने गांव के बच्चे को अपने गांव के ही स्कूल में पढ़ाना चाहिए जिससे गांव में कोरोना का किसी प्रकार का संकट पैदा नहीं होगा और शिक्षा पद्धति निरंतर बना रहे। ऐसी भी सरकार शिक्षकों को घर बैठे पगार दे रहा है ,ऑनलाइन क्लास से फेस टू फेस पढ़ाई बहुत बेहतर होगा,, और इसमें यह देखने को मिलता है कि छोटे-छोटे बच्चे जो प्राइमरी में अध्ययनरत है वह इधर-उधर घूमते नजर आते हैं तो  कहीं ना कहीं बच्चे पुस्तक से काफी दूर हो रहे हैं और वही उच्च क्लास के बच्चे ऑनलाइन क्लास के चक्कर में स्मार्टफोन 10 से 15000 रुपए की खरीदाए हैं और ग्रामीण स्तर में अधिकतर मां-बाप कृषि से ही जुड़े रहते हैं तो कहीं ना कहीं उन्हें भी परिवार चलाने में काफी तकलीफ होती हैं लेकिन सरकार के नियम को पालन करते हुए और अपने बच्चे को पढ़ाने के लिए महंगे से महंगे मोबाइल खरीदना पड़ा जिससे उसका रिजल्ट गलत आ रहा है ।ऑनलाइन क्लास मात्र 1 या 2 घंटे की होती है उसके बाद बच्चे कई घंटों तक मोबाइल में बिता देता है कई लोग पब्जी खेलते हैं और भी कई सरारते करते हैं, इससे अच्छा तो यही होता की...

मृत्युभोज सही या गलत

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आजकल मृत्युभोज के विरोध पर बहुत लिखा जा रहा है..मेरा मत अलग है..   मृत्युभोज कुरीति नहीं है.  समाज और रिश्तों को सँगठित करने के अवसर की पवित्र परम्परा है, हमारे पूर्वज हमसे ज्यादा ज्ञानी थे ! आज मृत्युभोज का विरोध है, कल विवाह भोज का भी विरोध होगा.. हर उस सनातन  परंपरा का विरोध होगा जिससे रिश्ते और समाज मजबूत होता है..  इसका विरोध करने वाले ज्ञानियों आपके  बाप दादाओ ने रिश्तों को जिंदा रखने के लिए ये परम्पराएं बनाई हैं!..., ये सब बंद हो गए तो रिश्तेदारों, सगे समबंधियों, शुभचिंतकों को एक जगह एकत्रित कर मेल जोल का दूसरा माध्यम क्या है,.. दुख की घड़ी मे भी रिश्तों को कैसे प्रगाढ़ किया जाय ये हमारे पूर्वज अच्छे से जानते थे..  हमारे बाप दादा बहुत समझदार थे,  वो ऐसे आयोजन रिश्तों को सहेजने और जिंदा रखने के किए करते थे। हा ये सही है की  कुछ लोगों ने मृत्युभोज को  हेकड़ी और शान शौकत दिखाने का   माध्यम बना लिया, आप पूड़ी सब्जी ही खिलाओ. कौन कहता है की 10 आइटम परोसो..  मैं खुद दिखावे का विरोधी हूँ लेकिन अपनी परंपरा का कट्टर...

खाने की थाली में क्यों नही धोना चाहिए हाथ

   शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ हमारे धार्मिक शास्त्रों मे ऐसी बहुत सी बातें लिखी हैं, जिन्हें जानना हमारे लिए अति आवश्यका है। मगर आज कल की पीढ़ी की बात करें तो ये अपनी संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। इसलिए आज अपने इस आर्टिकल में हम आपको ऐसी ही एक बात बताने जा रहे है जिसके बारे में जानना शायद हर किसी के लिए बहुत आवश्यक है। आप में से बहुत से लोगों ने देखा होगा कि कुछ लोग खाना खाते समय एक ऐसी भूल कर बैठते हैं, जिसका अंजाम बहुत बुरा होता है। जी हां, दरअसल काफी लोगों में ये आदत पाई जाती है कि वे खाना खाने बाद खाने की थाली में ही हाथ धो लेते हैं। 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 तो बता दें शास्त्रों में ऐसा करना बिल्कुल गलत माना जाता है। इनमें किए उल्लेख के अनुसार कभी भी किसी व्यक्ति को खाने की थाली में हाथ धोना नहीं चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के लिए ऐसा करना अशुभ माना जाता है। इसके अलावा ये भी माना जाता है कि थाली में हाथ धोने से उसमें बचे हुए अन्न का अनादर होता है। इतना ही नहीं भोजन की थाली में हाथ धोने से देवी लक्ष्मी और देवी अन्नपूर्णा भी नाराज़ होती हैं, जिससे घर में दरिद्रता आती है। 🚩...

घर मे सुख शांति हेतु कुछ ध्यान रखने योग्य बातें

हर व्यक्ति की कामना होती हैं की उसके घर में सदैव सुख समृद्धि बनी रहे, घर का वातावरण स्वर्ग की तरह सकारात्मक उर्जा और प्रेम एवं एक दूसरे के सहयोग से भरा पूरा हो । वैसे भी शास्त्रों में और हमारे पूर्वजों ने घर को मंदिर की संज्ञा देते हुए कहा हैं कि जिस घर में परिवार के सभी लोग आपसी तालमेल से रहते हैं उस घर में सदैव सुख शांति बनी रहती हैं, कभी की किसी बुरी नजर नहीं लगती । लेकिन वहीं घर-परिवार का वातावरण अनुकूल नहीं हो, तब वह प्रत्येक सदस्य के जीवन को प्रभावित करता है । अगर किसी के घर में किसी कारण से सुख शांति नहीं है, नीचे दिए गए छोटे लेकिन रामबाण घरेलु उपायों को आजमा कर आप हमेंशा के लिए अपने घर में सुख-शांति बनाए रख सकते हैं ।   1- घर में सुबह सुबह कुछ देर के लिए भक्ति गीत, भजन अवश्य करें या बजायें । 2- घर में कभी भी झाड़ू को खड़ा करके नहीं रखें, उसे पैर नहीं लगाएं, न ही उसके ऊपर से गुजरे अन्यथा घर में अलक्ष्मी निवास करने लगेगी । 3- अपने सोने के बिस्तर पर बैठकर कभी भोजन न करें, ऐसा करने से बुरे सपने आते हैं, या फिर घर में दरिद्रता का वास होने लगता है । 4- घर के मुख्य द्वार पर या इधऱ उ...